Rajasthan’s chief wildlife sanctuary राजस्थान के प्रमुख वन्य जीव अभ्यारण्य

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Rajasthan’s chief wildlife sanctuary  राजस्थान के प्रमुख वन्य जीव अभ्यारण्य

राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान – 3 अभ्यारण्य  National Park in Rajasthan – 3 Reserves

रणथम्भौर अभ्यारण्य 

केवलादेव अभ्यारण्य

मुकुदरा हिल्स अभ्यारण्य

(1)रणथम्भौर अभ्यारण्य (Ranthambore Sanctuary)

Ranthambore sanctuary is located in the district to remove roadblocks. Ranthambore sanctuary was established in the 1957-58. November 1, 1980 it was given national park status. In 1973-74 it was included in tiger conservation plan. It is India’s smallest tiger Jirrw project. It is also called Land of tiger. Besides Badyon Gdiyal, chital, nilgai, sambar, sloth bear, it Jrk meet other creatures. This National Park is located in the Aravalli and Vindhyachal ranges. Ranthambore Fort in the national park,Jogimahl, Rajabag, Gilai, Trinetra Ganesh Temple Drshniy sites.

रणथम्भौर अभ्यारण्य  सवाईमाधोपुर जिले में स्थित है। रणथम्भौर अभ्यारण्य की 1957-58 में स्थापना की गई। 1 नवम्बर 1980 को इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया। 1973-74 में इसे बाघ संरक्षण योजना में शामिल किया गया। यह भारत का सबसे छोटा टाइगर जिरर्व प्रोजक्ट है। इसे Land of tiger भी कहते हैं। बाद्यों के अलावा घड़ीयाल, चीतल, नीलगाय, सांभर, रीछ, जरख अन्य जीव इसमें मिलते हैं। यह राष्ट्रीय उद्यान अरावली और विन्ध्याचल पर्वतमालाओं के बीच में स्थित है। इस राष्ट्रीय उद्यान में रणथम्भौर दुर्ग, जोगीमहल, राजाबाग, गिलाई, त्रिनेत्र गणेश मन्दिर दर्शनिय स्थल हैं ।

 

(2)केवलादेव राष्ट्रीय अभ्यारण्य (Keoladeo National Reserve)

Keoladeo National Reserve  in Bharatpur. Ghana says it is also the state bird of paradise Pakrshi says. It is home to Asia’s largest breeding bird. In 1981 it was given national park status in 1985, the UNESCO World Natural Heritage List Dalakyhan get many species of birds. Some of which are immigrants. The major Siberian Crane migration in birds (cranes) is. Siberia’s winter here in Europe comes from the province.After the breeding period and Gishm returns. Here Surkhav, dragon, red necked parrots etc. See. Python Python can be seen here on points. The RA. A. The famous scientist Salim Ali Bird’s place of religious. Ra. U. Gambhiri and is at the confluence of Banganga.

)केवलादेव राष्ट्रीय अभ्यारण्य भरतपुर में है। इसे घाना पक्ष्ी बिहार भी कहते हैं इसे पक्षियों का स्वर्ग कहते हैं। यह एशिया की सबसे बड़ी पक्षी प्रजनन स्थली है। 1981 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया 1985 में इसे युनेस्को ने विश्व प्राकृतिक धरोहर सूची में डाला।यहां पक्षियों की अनेक प्रजातियां मिलती है। जिसमें से कुछ प्रवासी भी है। प्रवासियों पक्षियों में सबसे प्रमुख साइबेरियन क्रेन(सारस) है। जो यूरोप के साइबेरिया प्रान्त से शीतकाल में यहां आता है। और गीष्म काल में प्रजनन के बाद लौट जाता है। यहां सुर्खाव, अजगर, लाल गरदन वाले तोते आदि मिलते हैं। यहां के पाईथन प्वांइट पर अजगर देखे जा सकते है। यह रा. उ. प्रसिद्ध पक्षी वैज्ञानिक सलीम अली की कर्मस्थली रहा है। रा. उ. गंभीरी और बाणगंगा के संगम पर है।

(3)मुकुन्दरा हिल्स अभ्यारण्य (Mukundera Hills Reserves)

Mukundera Hills Sanctuary in Kota and Jhalawar. Its name was first pass. Later in 2003 it was named the Rajiv Gandhi National Park. Mukundera Hills is now the sanctuary. The sanctuary is located Phadhiya of Mukundvadha. Aski was founded in 1955. The sanctuary Gdiyal, cranes, parrots Gagroni is famous for. The observation post to see the wild animals remain. Says the Awdia. Most creatures in the kingdom is in the sanctuary.

मुकुन्दरा हिल्स अभ्यारण्य  कोटा व झालावाड़ में है। पहले इसका नाम दर्रा था। बाद में 2003 में इसका नाम राजीव गांधी नेशलन पार्क कर दिया गया। अब इसका नाम मुकुन्दरा हिल्स अभ्यारण्य है। इसी अभ्यारण्य में मुकुन्दवाड़ा की पहाड़ीया स्थित है। 1955 में असकी स्थापना हुई। यह अभयारण्य घडीयाल,सारस, गागरोनी तोते के लिए प्रसिद्ध है। यहां जीव जन्तुओं को देखने के लिए अवलोकन स्तम्भ बने हुए हैं। जिसे औदिया कहते है। राज्या में सर्वाधिक जीव इसी अभ्यारण्य में है।

राजस्थान के वन्य जीव अभ्यारण्य – 26 (Rajasthan Wildlife Sanctuary – 26)

 

(1)सारिस्का वन्य जीव अभ्यारण्य (Sariska Wildlife Sanctuary)

Sariska Wildlife Sanctuary is located in Alwar district. It was founded in 1900. In 1955 it was recognized as a wildlife sanctuary in Gyakl978-79 Tiger Reserve project was started here. Project Tiger Reserve of Rajasthan is another. Nowadays it is because of the extinction of the tiger sanctuary. Against overwhelming odds Re-Introduction of the scheme has been launched here. Tigress from Ranthambore 3 and 2 tiger under which it will be released.

सारिस्का वन्य जीव अभ्यारण्य अलवर जिले में स्थित है। 1900 में इसकी स्थापना की गई। 1955 में इसे वन्य जीव अभ्यारण्य का दर्जा दिया गया।1978-79 में यहां टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट शुरू किया गया। यह राजस्थान का दुसरा टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट है। आजकल यह अभयारण्य बाघों की विलुप्ति के कारण चर्चा में है। इसके लिए यहां बाधों की री-इन्ट्रोडक्शन योजना शुरू की गई है। जिसके अन्तर्गत रणथम्भौर से 3 बाघिन और 2 बाघ इसमें छोड़े जायेंगे।

The sanctuary Kraska and Kanknbadhi plateau, Brithri, Nilkt Mahadev Temple, Pandupol, Talvriksh, canopies of Neda, Sariska Palace Hotel Narayani Mata temple, RTDC hotel is located in the Tiger Den.

इस अभ्यारण्य में क्रासका व कांकनबाड़ी पठार, भृतहरि, नीलकठ महादेव मन्दिर, पाण्डुपोल, तालवृक्ष, नेडा की छतरियां, नारायणी माता मन्दिर सरिस्का पैलेस होटल, RTDC का टाइगर डेन होटल स्थित है।

Sariska Wildlife Sanctuary
Sariska Wildlife Sanctuary

(2)राष्ट्रीय मरू अभ्यारण्य  (National desert sanctuary)

It is located in Jaisalmer and Barmer desert national park by area rule. Is the largest sanctuary. Established on August 4, 1981. The Sanctuary Wood Faॅsils Park are renowned for Akl. It is 18 million years old Kashtavsesh. Godavn, Chinkara, black deer, fox, Andrsns Taॅd, monitor lizard, desert cat Pivna, Cobra, etc. It Rslwaipr meet

राष्ट्रीय मरू उद्यान  जैसलमेर और बाड़मेर में स्थित है।यह क्षेत्रफल की दृष्टि से राज. का सबसे बड़ा अभ्यारण्य है। 4 अगस्त 1981 को इसकी स्थापना हुई। यह अभयारण्य आकल वुड फाॅसिल्स पार्क के कारण प्रसिद्ध हैं। यहां 18 करोड़ वर्ष पुराने काष्ठावशेष है। गोडावन,चिंगारा, काले हिरण, लोमड़ी, एण्डरसन्स टाॅड, गोह, मरू बिल्ली पीवणा, कोबरा, रसलवाईपर आदि इसमें मिलते हैं।

(3)सीतामाता अभ्यारण्य (Sitamata Reserves)

Sitamata Sanctuary Chittorgarh and Udaipur is located in Pratapgarh. Established in 1971. The sanctuary is famous for black deer. Also found in this sanctuary Kromen cranes and migratory birds Kurgan Mobia Saipas Ratends bring grass and bush get. The pond is located in the Ancient Bansolav and Dugolav name. Dronpur Chhapr called the Mahabharata. Guru Dronacharya were going to stay right here.

सीतामाता अभ्यारण्य चितौड़गढ़ प्रतापगढ़ और उदयपुर में स्थित है। 1971 में इसकी स्थापना हुई। यह अभयारण्य काले मृगों के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा क्रोमेन क्रेन व कुरजां प्रवासी पक्षी इसमें मिलते है।इस अभयारण्य में मोबिया साइपस राटेण्डस घास और लाना झाड़ी मिलती है। इसमें भैंसोलाव तथा डूगोलाव नाम के प्राचिन तालाब स्थित है। महाभारत काल में छापर को द्रोणपुर कहा जाता था। गुरू द्रोणाचार्य यहीं के रहने वाले थे।

Sitamata Reserves
Sitamata Reserves

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(4)कुम्भलगढ़- अभयारण्य (Kumblgdh- sanctuary)

Kumblgdh- sanctuary UDAIPUR- shift in Rajsamand district. It was founded in 1971. The sanctuary is famous throughout the country for breeding foxes. The wolf, bear, chicken, Casinga (Gtel) meet. Sandalwood trees are also found in the sanctuary. Ranakpur Jain temple is the sanctuary.

कुम्भलगढ़- अभयारण्य  उदयपुर- पाली, राजसमंद जिले में है। 1971 में इसकी स्थापना की गई। यह अभयारण्य भेडीये प्रजनन के लिए देश भर में प्रसिद्ध है। यहां भेडि़या, रीछ, मुर्गे, चैसिंगा(घटेल) मिलते हैं। इस अभ्यारण्य में चंदन के वृक्ष भी मिलते हैं। रणकपुर के जैन मन्दिर इसी अभयारण्य है।

(5)चंबल घड़ीयाल-अभयारण्य (Gdiyal Chambal sanctuary)

Gdiyal Chambal Chambal River Sanctuary, which is built into the Yamuna river from the ocean Ranapratap spans. The only Anrtrazziy (Raj., M. Land, the. State) sanctuary. Century is the country’s only river Chambal. It is also called the world of Gdiyalon.

चंबल घड़ीयाल-अभयारण्य  चंबल नदी में बनाया गया है जो राणाप्रताप सागर से यमुना नदी तक विस्तृत है। यह एकमात्र अन्र्तराज्जीय(राज., म. प्रदेश, उ. प्रदेश) अभयारण्य है। चंबल देश की एकमात्र नदी सेन्चुरी है। इसे घड़ीयालों का संसार भी कहते हैं ।

(6)तालछापर अभ्यारण्य – चुरू (Talchhapr Reserves – Churu)

इस अभ्यारण्य में काले हिरणों को संरक्षण दिया है। तालछापर अभ्यारण्य को प्रवासी पक्षी “कुंरजा” की शरण स्थली कहा जाता है।

 

Talchhapr Reserves - Churu
Talchhapr Reserves – Churu

 

(7)कैला दैवी, करौली जिले मे स्थित है  

(8)फुलवारी की नाल, उदयपुर – सोम का उद्गम, टीक के वृक्ष का प्रथम Human Anatomy park.

(9)टाडगगढ़ रावली, अजमेर जिले मे स्थित है  

(10)रामगढ़ विषधारी, बूंदी – मेज नदी निकलती है, राज का एक मात्र ऐसा अभयारण्य जिसमेें बाघ परियोजना के अलावा बाघ मिलते है।

(11)जमवा रामगढ़, जयपुर जिले मे स्थित है  

(12)मांउट आबु, सिरोही- जंगली मुर्गे के लिए प्रसिद्ध, गुरूशिखर इसी अभयारण्य में कारा घास मिलता है।

(13)राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य – राजस्थान, मध्य प्रदेश, उतर प्रदेश

(14)भैंसरोडगढ़, चितौडगढ – घड़ीयालों के लिए प्रसिद्ध

(15)बंधबरैठा, भरपुर – बारैठा झील, परिन्दों का घर के लिए प्रसिद्ध

(16)बस्सी, चितौड़गढ़ जिले मे स्थित है  

(17)जवाहर सागर कोटा – घड़ीयालों का प्रजनन केन्द्र, मगरमच्छ, गैपरनाथ मन्दिर, गडरिया महादेव, कोटा बांध इसी में है।

(18)शेरगढ़ बांरा – परवन नदी गजरती है, शेरगढ़ दुर्ग, सांपों की संरक्षण स्थली, चिरौजी के वृक्ष मिलते है।

(19)जयसमंद, उदयपुर – बघेरों के लिए प्रसिद्ध, इसे जलचरों की बस्ती कहते हैं। रूठी रानी का महल इसी में है।

(20)नाहरगढ़, जयपुर – चिकारा के लिए प्रसिद्ध, राज्य का प्रथम देश का दुसरा जैविक उद्यान, राज्य का पहला देश का तिसरा बियर रेस्क्यू सेंटर बनाया गया है।

(21)रामसागर, धौलपुर जिले मे स्थित है 

(22)केसरबाग, धौलपुर जिले मे स्थित है  

(23)वनविहार, धौलपुर – सांभर, सारस जिले मे स्थित है  

(24)सज्जनगढ़, उदयपुर जिले मे स्थित है  

(25)सरिस्का अ, अलवर -जिले मे स्थित है  

राजस्थान के आखेट निषेध क्षेत्र – 33 (Hunting prohibition area in Rajasthan – 33)

(1)बागदड़ा – उदयपुर जिले मे स्थित है 

(2) बज्जु – बीकानेर जिले मे स्थित है

(3) रानीपुरा -टोंक जिले मे स्थित है 

(4) देशनोक – बीकानेर जिले मे स्थित है 

(5) दीयात्रा – बीकानेर जिले मे स्थित है 

(6) जोड़ावीर – बीकानेर जिले मे स्थित है 

(7) मुकाम – बीकानेर जिले मे स्थित है 

(8) डेचुं – जोधपुर जिले मे स्थित है 

(9) डोली – जोधपुर -काले हिरण के लिए

(10) गुढ़ा – बिश्नोई – जोधपुर जिले मे स्थित है 

(11) जम्भेश्वर – जोधपुर जिले मे स्थित है 

(12) लोहावट – जोधपुर जिले मे स्थित है 

(13) साथीन – जोधपुर  जिले मे स्थित है 

(14) फिटकाशनी – जोधपुर जिले मे स्थित है 

(15) बरदोद – अलवर जिले मे स्थित है 

(16) जौड़ीया – अलवर जिले मे स्थित है 

(17) धोरीमन्ना – बाड़मेर जिले मे स्थित है 

(18) जरोंदा – नागौर जिले मे स्थित है 

(19) रोतू – नागौर जिले मे स्थित है 

(20) गंगवाना – अजमेर जिले मे स्थित है 

(21) सौंखलिया- अजमेर – गोडावण

(22) तिलोरा – अजमेर जिले मे स्थित है 

(23) सोरसन – जालौर – गोडावण

(24) संवत्सर-कोटसर- चुरू जिले मे स्थित है 

(25) सांचैर – जालौर जिले मे स्थित है 

(26) रामदेवरा – जैसलमेर जिले मे स्थित है 

(27)कंवाल जी – सा. माधोपुरजिले मे स्थित है 

(28) मेनाल – चितौड़गढ़ जिले मे स्थित है 

(29) महलां – जयपुर जिले मे स्थित है 

(30) कनक सागर – बूंदी – जलमुर्गो

(31) जवाई बांध – पाली जिले मे स्थित है 

(32) संथाल सागर – जयपुर जिले मे स्थित है 

(33)उज्जला – जैसलमेर जिले मे स्थित है

राजस्थान के मृगवन – 7 (Rajasthan sanctuary – 7)

(1)Ashok Vihar, Jaipur is located in the district अशोक विहार, जयपुर जिले मे स्थित है

(2) Chittorgarh sanctuary, located in Chittorgarh district चितौड़गढ़ मृगवन, चितौड़गढ़ जिले मे स्थित है 

(3)sanctuary Pushkar, Pushkar is located in the district पुष्कर मृगवन, पुष्कर जिले मे स्थित है

(4) Sanjay Park – Shahpura (Jaipur) is located in the district संजय उद्यान – शाहपुरा (जयपुर) जिले मे स्थित है

(5) Szzngdh, Udaipur – another state botanical garden is located सज्जनगढ़, उदयपुर – राज्य का दुसरा जैविक उद्यान स्थित है

(6) Amrita Devi, Kejdli – Fair fills the tenth Bhadrapad Shukla अमृता देवी, खेजड़ली – भाद्रपद शुक्ल दशमी को मेला भरता है

(7) Macia Safari Park, Jodhpur – the country’s first botanical garden is desert. माचिया सफारी पार्क, जोधपुर – यहां देश का पहला मरू वानस्पतिक उद्यान किया जा रहा है।

राजस्थान के जैविक उद्यान – 2 (Rajasthan’s organic garden – 2)

(1)Nahargarh Fort, Jaipur First नाहरगढ़, जयपुर- प्रथम

(2) Szzngdh, Udaipur is located in the district सज्जनगढ़, उदयपुर जिले मे स्थित है 

राजस्थान के जन्तुआलय – 5 (Rajasthan Jnhualy – 5)

(1) Jaipur (1876) – the oldest, founded by Ram Ram Niwas Bagh in, crocodile and tiger breeding center is Prasid जयपुर(1876) – सबसे पुराना, रामनिवास बाग में स्थित रामसिंह द्वारा स्थापित, मगरमच्छ और बाघ प्रजनन केन्द्र के लिए प्रसीद है

(2)  Udaipur (1878) – the rose garden, the tiger, the Sanctuary, to bear populations is Prasid उदयपुर(1878) – गुलाब बाग, बाघ, बघेरा, भालु के लिए प्रसीद है

(3) Bikaner (1922) – Public gardens, currently closed बीकानेर(1922) – सार्वजनिक उद्यान, वर्तमान में बंद

(4)  odhpur (1936) – Reliant Park, artificial breeding center for birds of famous Godavn quota (1954) is the Prasid जोधपुर(1936) – उम्मेद बाग, पक्षियों के लिए प्रसिद्ध गोडावन का कृत्रिम प्रजनन केन्द्र कोटा(1954) के लिए प्रसीद है

Note: – अजमेर में प्रस्तावित है।

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