Rajasthan’s vocabulary राजस्थान की प्रमुख शब्दावली

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Rajasthan’s vocabulary राजस्थान की प्रमुख शब्दावली

(1).हरावल  प्रथा (Khravl practice)

This practice is called in the army vanguard to the frontline. इस प्रथा मे सेना की  अग्रिम पंक्ति  को हरावल कहा जाता है।

(2).ताजीम प्रथा (practice Ktazim)

 In practice this noble stand by the king upon entering court to honor that. इस प्रथा मे सामंत के राजदरबार में प्रवेश करने पर राजा के द्वारा खडे़ होकर उसका सम्मान करना।

(3).मिसल प्रथा (the practice Kmisl)

According to the practice of all people queued to sit in the royal court, the Missal. इस प्रथा के अनुसार राज दरबार में सभी व्यक्तियों का पंक्तिबद्ध बैठना, मिसल है।

(4) तलवार बंधाई  प्रथा (the practice Kmisl)

According to this custom, the ceremony is to be declared heir. इस प्रथा के अनुसार उत्तराधिकारी घोषित होने पर की जाने वाली रस्म है।

(5) खालसा भूमि प्रथा (customary land Khalsa)

According to this practice was in direct control of the king इस प्रथा के अनुसार सीधे राजा के नियंत्रण में होती थी।

(6) जागीर भूमि  प्रथा (Manor Ground System)

Was under the control of the grantee. जागीरदार के नियंत्रण में होती थी।

(7) लाटा  प्रथा (Lata practice)

Traditionally, after the harvest was weighing the state fee / tax. इस प्रथा के अनुसार फसल कटाई के पश्चात् तोल कर लिया जाने वाला राजकीय शुल्क /कर है।

(8) कुंडा प्रथा (Swivel practice)

According to the practice of crop yield based on the charged state estimated fee / tax. इस प्रथा के अनुसार खड़ी फसल की अनुमानतः उपज के आधार पर लिया जाने वाला राजकीय शुल्क/कर है।

(9).कामठा लाग  प्रथा (applied practice Kkamta)

Traditionally, the construction of the fortress was taken by the public’s Kamta called. इस प्रथा के अनुसार दुर्ग के निर्माण के समय जनता से लिया गया कर कामठा कहलाता है।

(10) खिचड़ी लाग प्रथा (can not practice applicable)

For food by soldiers in wartime rulers can not be collected from the public log called Sthaniyy युद्ध के समय सैनिकों के भोजन के लिए शासको द्वारा स्थानीयय जनता से वसूला गया कर खिचड़ी लाग कहलाता है।

(11) कीणा  प्रथा (Kina practice)

Traditionally, vegetables or other goods in the villages to buy food given is called Kina.  इस प्रथा के अनुसार गावों में सब्जी अथवा अन्य सामान खरीदने के लिए दिया जाने वाला अनाज कीणा कहलाता है।

(12).प्रिंवीपर्स  प्रथा (Kprinviprs practice)

According to this practice is called privy purse Sshaskon given to maintenance. इस प्रथा के अनुसार श्शासकों को दिया जाने वाला गुजारा भत्ता प्रिवीपर्स कहलाता है।

(13).करब प्रथा (Kkrb practice)

According to the practice of respect nobles get his hands on the shoulders of Anrgt vassal king would take his chest. Which means that there is space in my heart

इस प्रथा के अनुसार सामन्तों को प्राप्त विशेष सम्मान जिसके अन्र्गत राजा जागीरदार के कन्धों पर हाथ रख कर अपनी छाती तक ले जाता था। जिसका अभिप्राय होता था कि आपका स्थान मेरे ह्रदय मे है।

(14) बिगोड़ी प्रथा (Bigodi practice)

According to the practice under which the land is cash recovery. इस प्रथा के अनुसार यह भूमि कर है जिसके अन्तर्गत नकद रकम वसूली जाती है।

(15) सिगोटी प्रथा (Sigoti practice)

This practice was a tax on the sale of animals. इस प्रथा के अनुसार पशुओं के विक्रय पर लगने वाला कर था।

(16) जाजम प्रथा (custom bedspread)

This practice was in accordance with a tax on land sales. इस प्रथा के अनुसार भूमि विक्रय पर लगने वाला कर था।

(17).जकात  प्रथा (Kjkat practice)

This practice, according to the customs (in Bikaner area) इस प्रथा के अनुसार सीमा शुल्क (बीकानेर क्षेत्र मे)

(18).डागसीमा शुल्क था।

राजस्थान में प्रचलित प्रथाएं (Practices prevalent in Rajasthan)

(1) कन्या वध प्रथा- (Slaughter this week Prtha)

Rajputs in Rajasthan’s longstanding practice under which the girl gave birth to her opium was killed or strangled. In Rajasthan, the first stop on the practice of the Political Agent Will Haduti Kvinsn efforts at Lord William Bantik 1833 AD. In the 1834 quota. E. Bundi state imposed.

राजस्थान मे राजपूतों के समय से प्रचलित प्रथा जिसके अन्तर्गत लड़की के जन्म लेते ही उसे अफीम देकर अथवा गला दबाकर मार दिया जाता था। ओर राजस्थान मे इस प्रथा पर सर्वप्रथम रोक हाडौती के पोलिटिकल एजेंट विल क्विंसन के प्रयासों से लार्ड विलियम बैंटिक के समय 1833 ई. में कोटा में तथा 1834 ई. में बूंदी राज्य में लगाई गई।

(2) दास प्रथा (Slavery)

Slavery loser in the war on its people captive as slaves were kept, as well as buying and selling of slaves was used. On the occasion of the marriage of the girl at the time of Rajputs in Rajasthan circle / tablet was sent as slaves. 1832 AD The first stop on this practice. In the area have put Haduti

दास प्रथा युद्ध में हारे हुए व्यक्तियों को बंदी बनाकर  अपने यहां दास के रूप में रखा जाता था, साथ ही दासों का क्रय-विक्रय भी किया जाता था। ओर राजस्थान मे राजपूतों   के समय में लड़की की शादी के अवसर पर गोला/गोली को दास-दासी के रूप में साथ भेजा जाता था। इस प्रथा पर सर्वप्रथम रोक सन् 1832 ई. मे हाडौती क्षेत्र में लगाई है।

(3) मानव व्यापार प्रथा (Human trade practice)

Under the State Government on Human merchandising quota levy was charged, the “Cagan was called”. In Rajasthan, the first stop on this practice in 1847 AD. It has been done in Jaipur State.

कोटा राज्य के अन्तर्गत मानव क्रय-विक्रय पर राजकीय शुल्क वसुला जाता था, जिसे “चैगान” कहा जाता था। ओर राजस्थान मे इस प्रथा पर सर्वप्रथम रोक 1847 ई. में जयपुर रियासत में लगाई गई है।

(4) विधवा विवाह प्रथा (Widow marriage)

Widow 1856 by the efforts of Vidya Sagar Chand marriage. I was Parit Widow Remarriage Act by Lord Dalhousie विधवा विवाह प्रथा ईश्वर चंद विद्या सागर के प्रयासों से 1856 ई. में लार्ड डलहौजी द्वारा विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारीत किया गया।

(5) दहेज प्रथा (dowry system)

Dowry Prohibition Act, 1961. E. was in Parit. दहेज प्रथा निरोधक कानून 1961 ई. में पारीत हुआ।

(6) बेगार प्रथा (Forced labor practices)

It is customary practice of forced labor by feudal lords in which a person may not get the job done after the wage was practiced. 1961 E. practice forced labor. Labour System in Gikbndhua bans / Sagdi practice / Hali Prthaset, pawnbroker or funds lent by the bourgeoisie against the individual borrower or a family member has their own here as servant was.

बेगार प्रथा वह प्रथा होती है जिसमे जागीरदारों द्वारा किसी व्यक्ति से काम करवाने के बाद कोई मजदूरी न देने की प्रथा थी। बेगार प्रथा  पर सन् 1961 ई. में रोक लगाई गई।बंधुआ मजदूर प्रथा/सागडी प्रथा/ हाली प्रथासेठ, साहुकार अथवा पूंजीपति वर्ग के द्वारा उधार दी गई धनराशि के बदले कर्जदार व्यक्ति या उसके परिवार के किसी सदस्य को अपने यहां नौकर के रूप में रखता था।


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