When Did Alexander Invade India

Description

Alexander was the Greek administrator of Macedonia (Macedonian), from 20 July 356 to 11 June 323 BC). He is also known as Alexandre III and Alexandria Macedonian. He is considered the most accomplished and successful commander in history. Until his death, he had conquered all the land which had ancient Greek people. That is why he is also called World Winner. He during his tenure in Iran, Syria, Egypt, Mesopotamia, Finished, Judea, Gaja, Baktria, and India had won the state of Punjab.

सिकंदर (20 जुलाई 356 ईसापूर्व से 11 जून 323 ईसा पूर्व) मकदूनियाँ, (मेसेडोनिया) का ग्रीक प्रशासक था। वह एलेक्ज़ेंडर तृतीय तथा एलेक्ज़ेंडर मेसेडोनियन नाम से भी जाना जाता है। इतिहास में वह सबसे कुशल और यशस्वी सेनापति माना गया है। अपनी मृत्यु तक वह उस तमाम भूमि को जीत चुका था जिसकी जानकारी प्राचीन ग्रीक लोगों को थी। इसीलिए उसे विश्वविजेता भी कहा जाता है। उसने अपने कार्यकाल में इरान, सीरिया, मिस्र, मसोपोटेमिया, फिनीशिया, जुदेआ, गाझा, बॅक्ट्रिया और भारत में पंजाब तक के प्रदेश पर विजय हासिल की थी।

Greek ruler Sikandar invaded India 327 BC Done in He was returning to India after coming back to victory in some states, then he saw a lot of naked Jain monks in a garden near Taxila and saw the ascetic. He sent one of his envoys and wanted to invite Munirajas but Muniraj did not come. Then Alexander himself reached that place and was very impressed by seeing the tenacity of Digambar Munirajas. One of them was Kalyan Muni and From which Alexander prayed for the preaching of religion in Greece and with great urgency, Kalyan Muni went with him. The Greeks were very influenced by the rules, which were followed by Muni Kalyan and all their munis, who were not allowed to remain naked, to do land renovations, not to do any green work, to accept any invitation. Muni Kalyan was a master in astrology. He had many predictions and he had already declared Sikandar's death And Education of Digvar Jain Shamans had special effects on the Greeks. In the city of Anthias of Greece, Kalyan Muni's place of worship was made.

यूनानी शासक सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण 327 ई. पू. में किया। वह भारत आकर कुछ राज्यों में विजय प्राप्त करके वापस लौट रहा था, तब उसने तक्षशिला के पास एक उद्यान में बहुत से नग्न जैन मुनियों को तपस्यारत देखा। उसने अपने एक दूत को भेजकर मुनिराजों को बुलवाना चाहा लेकिन मुनिराज नहीं आये। तब सिकन्दर स्वयं उस स्थान पर पहुँचा और दिगम्बर मुनिराजों के तप को देखकर बहुत प्रभावित हुआ। उनमें से एक कल्याण मुनि थे,जिनसे सिकन्दर ने यूनान में धर्म प्रचार करने की प्रार्थना की और उसके बहुत आग्रह से कल्याण मुनि उसके साथ गए। नग्न रहना, भूमि शोधन कर चलना, हरितकाय का विराधन न करना, किसी का निमन्त्रण स्वीकार न करना इत्यादि जिन नियमों का पालन मुनि कल्याण और उनके सभी मुनि गण करते थे, उनसे यूनानी बहुत प्रभावित थे। मुनि कल्याण ज्योतिष शास्त्र में निष्णात थे। उन्होंने बहुत—सी भविष्यवाणियाँ की थीं और सिकन्दर की मृत्यु को भी उन्होंने पहले से घोषित कर दिया था।इन दिगम्बर जैन श्रमणों की शिक्षा का यूनानियों पर विशेष प्रभाव पड़ा। यूनान के एंथेस शहर में कल्याण मुनि का समाधि स्थल बना है।