When was the Regulating Act passed

Description

 Regulating Act passed  in 1773

Bengal's governance was vested in the governor-general and the four-member council. It was also arranged for the council to be decided by the majority. Warren Hastings was appointed as the governor-general and Clavering, Monson, Barwell, and Pfiphiffs were appointed as members of the Council by the Act. All these were for five years and the recommendation of the Board of Directors could only be removed by the British emperor.

बंगाल का शासन गवर्नर जनरल तथा चार सदस्यीय परिषद में निहित किया गया। इस परिषद में निर्णय बहुमत द्वारा लिए जाने की भी व्यवस्था की गयी। इस अधिनियम द्वारा प्रशासक मंडल में वारेन हेस्टिंग्स को गवर्नर जनरल के रूप में तथा क्लैवरिंग, मॉनसन, बरवैल तथा पिफलिप प्रफांसिस को परिषद के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया। इन सभी का कार्यकाल पांच वर्ष का था तथा निदेशक बोर्ड की सिफारिश पर केवल ब्रिटिश सम्राट द्वारा ही इन्हें हटाया जा सकता था।

This Act established a Supreme Court in Bengal (Calcutta). Elijah Impe was appointed the first Chief Justice of the Supreme Court (Supreme Court). This court was given extensive rights in Civil, Foreclosure, Water Services, and Drafting matters. The court also had the right to hear the matter against the company and the persons engaged in the service of the emperor. The appeal could be made in the Prey Council based in England against the decision of this court.

इस अधिनियम द्वारा बंगाल (कलकत्ता) में एक उच्चतम न्यायालय की स्थापना की गयी। एलिजा इम्पे को उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) का प्रथम मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इस न्यायालय को दीवानी, फौजदारी, जल सेना तथा धाख्रमक मामलों में व्यापक अधिकार दिया गया। न्यायालय को यह भी अधिकार था कि वह कम्पनी तथा सम्राट की सेवा में लगे व्यक्तियों के विरुद्ध मामले की सुनवायी कर सकता था। इस न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध इंग्लैंड स्थित प्रिवी कौंसिल में अपील की जा सकती थी।