International Gold Price कौन तय करता है? ये हैं वो 15 दिग्गज कंपनियां

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क्या आप जानते हैं कि दुनिया भर में सोने का भाव (Gold Price) कौन तय करता है? यह काम किसी एक देश या सरकार का नहीं, बल्कि London Bullion Market Association (LBMA) के 15 दिग्गज अंतरराष्ट्रीय बैंकों और कंपनियों का है। जानिए इन 15 महाशक्तियों के नाम, जो हर रोज़ दिन में दो बार इलेक्ट्रॉनिक ऑक्शन के ज़रिए गोल्ड का इंटरनेशनल बेंचमार्क रेट फिक्स करती हैं और समझें कि भारत में इसका क्या असर होता है। पूरी इनसाइड स्टोरी के लिए अभी क्लिक करें!

Gold Price Fixing: जानिए उन 15 ग्लोबल बैंकों के नाम, जो हर रोज़ तय करते हैं सोने का रेट

दुनियाभर में सोने की कीमत किसी एक संस्था द्वारा तय नहीं की जाती। इसके बजाय, लंदन में LBMA (London Bullion Market Association) के बेंचमार्क सिस्टम के तहत रोज़ाना दो बार इलेक्ट्रॉनिक नीलामी होती है। इस प्रक्रिया को ICE Benchmark Administration (IBA) संचालित करता है, जिसमें 15 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैंक और ट्रेडिंग कंपनियाँ सीधे भाग लेती हैं। इसी नीलामी के आधार पर सोने की अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमत तय होती है, जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के गोल्ड मार्केट में किया जाता है

ग्लोबल गोल्ड प्राइस (जिसे London Fix भी कहा जाता है) तय करने वाली इन 15 प्रमुख कंपनियों और बैंकों के नाम निम्नलिखित हैं:

1. JPMorgan Chase Bank
2. Goldman Sachs International
3. HSBC Bank USA
4. Bank of China
5. Morgan Stanley
6. Standard Chartered Bank
7. UBS AG
8. Industrial and Commercial Bank of China (ICBC)
9. Bank of Communications
10. Toronto-Dominion Bank (TD Bank)
11. Coins ‘N Things (CNT)
12. Jane Street Global Trading
13. Marex Financial
14. StoneX Financial (पहले INTL FCStone)
15. Koch Supply & Trading

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यह पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है?

– दिन में दो बार गोल्ड ऑक्शन: लंदन में रोज़ाना सुबह 10:30 बजे और दोपहर 3 बजे सोने की कीमत तय करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक नीलामी होती है। इसमें प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैंक और ट्रेडिंग कंपनियाँ हिस्सा लेती हैं।

– डिमांड और सप्लाई से तय होता है रेट: इस नीलामी में सोने की खरीद और बिक्री के ऑर्डर्स के आधार पर कीमत तय की जाती है। जब खरीदारों और विक्रेताओं के ऑर्डर्स के बीच संतुलन बन जाता है, तो उस समय की अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमत निर्धारित हो जाती है।

– भारत में कैसे तय होती है सोने की कीमत? अंतरराष्ट्रीय बाजार में तय हुई कीमत का असर भारत में सोने के भाव पर भी पड़ता है। हालांकि, भारत में सोने की अंतिम कीमत तय होने में रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, 3% GST और ज्वेलर के मेकिंग चार्ज जैसे अन्य खर्च भी शामिल होते हैं। इसलिए भारत में सोने का भाव अंतरराष्ट्रीय कीमत से अलग हो सकता है।

भारत में आपकी जेब पर इसका क्या असर पड़ता है?

लंदन में सोने की अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमत तय होने का सीधा असर भारत के गोल्ड मार्केट पर भी पड़ता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में सोना उसी कीमत पर मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर आपकी स्थानीय ज्वेलरी शॉप तक पहुंचने के दौरान कई दूसरे खर्च भी जुड़ते हैं, जो सोने की अंतिम कीमत तय करते हैं।

आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।

1. रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का कारोबार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है। ऐसे में अगर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होता है, तो भारत के लिए सोना खरीदना महंगा हो सकता है। वहीं, रुपया मजबूत होने पर सोने की कीमतों पर गिरावट का दबाव पड़ सकता है।

2. इंपोर्ट ड्यूटी यानी आयात शुल्क

भारत अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। इस पर सरकार द्वारा निर्धारित आयात शुल्क लगता है। यह शुल्क सोने की लागत बढ़ाता है और घरेलू बाजार में इसकी कीमत को प्रभावित करता है। आयात शुल्क की दर में बदलाव होने पर भारत में सोने के भाव भी प्रभावित हो सकते हैं।

3. 3% GST

भारत में सोना खरीदते समय GST भी देना पड़ता है। सोने की खरीद पर आम तौर पर 3% GST लागू होता है। इससे ग्राहक को सोने की मूल कीमत के अलावा टैक्स भी चुकाना पड़ता है।

4. मेकिंग चार्ज और ज्वेलर का मार्जिन

अगर आप सोने के गहने खरीदते हैं, तो उनकी कीमत में मेकिंग चार्ज भी जुड़ता है। यह चार्ज गहने के डिजाइन, कारीगरी और ज्वेलर की कीमत तय करने की नीति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसके अलावा, स्थानीय बाजार की परिस्थितियां भी अंतिम कीमत को प्रभावित कर सकती हैं।

यानी, भारत में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर नहीं करती। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात शुल्क, GST और गहने बनाने की लागत जैसे कई कारक मिलकर तय करते हैं कि आपको दुकान पर सोना किस भाव में मिलेगा।

सोने की कीमत से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत कौन तय करता है?

अंतरराष्ट्रीय गोल्ड बेंचमार्क कीमत लंदन में LBMA Gold Price प्रक्रिया के तहत तय होती है। इस इलेक्ट्रॉनिक नीलामी का संचालन ICE Benchmark Administration (IBA) करता है।

2. क्या अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव गिरने से भारत में भी सोना सस्ता हो जाता है?

जरूरी नहीं। अंतरराष्ट्रीय कीमत गिरने से भारत में सोना सस्ता हो सकता है, लेकिन अगर इसी दौरान डॉलर महंगा हो जाए या रुपये की कीमत कमजोर हो जाए, तो इसका असर कम हो सकता है।

3. भारत में सोने की कीमत रोज क्यों बदलती है?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, मांग और आपूर्ति तथा घरेलू बाजार की परिस्थितियों में बदलाव के कारण भारत में सोने के भाव रोज घट-बढ़ सकते हैं।

4. सोना खरीदने पर कितना GST लगता है?

सोने की खरीद पर आम तौर पर 3% GST लागू होता है। सोने के गहनों के बिल में मेकिंग चार्ज पर भी GST की गणना लागू नियमों के अनुसार होती है।

5. क्या हर शहर में सोने का भाव एक जैसा होता है?

नहीं। अलग-अलग शहरों में परिवहन लागत, स्थानीय मांग, ज्वेलर्स के मार्जिन और अन्य खर्चों के कारण सोने के भाव में अंतर हो सकता है।

6. सोने के गहनों की कीमत और सोने के बाजार भाव में क्या अंतर है?

बाजार भाव आम तौर पर सोने की शुद्धता और वजन के आधार पर बताया जाता है। गहनों की अंतिम कीमत में सोने की लागत के साथ मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स भी शामिल होते हैं।

7. क्या सोने की अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमत ही भारत में सोने का अंतिम भाव तय करती है?

नहीं। यह एक महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन भारत में अंतिम भाव पर विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू बाजार की परिस्थितियों का भी असर पड़ता है।

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