Why are questions being raised regarding the institutions of Election Commissioners and the SIR?

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चुनाव आयुक्तों की संस्थाएं और एसआईआर को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल? Why are questions being raised regarding the institutions of Election Commissioners and the SIR?

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और SIR को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश की राजनीति में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
इसी मुद्दे को लेकर मुंबई से लेकर दिल्ली तक प्रदर्शन भी हुए हैं।

मुंबई में उद्धव और राज ठाकरे का प्रदर्शन

मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। दोनों नेताओं की पार्टियों ने
SIR की प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

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राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में SIR को रद्द करने की मांग की। उनका कहना था कि सरकार किसकी बनेगी,
इसका फैसला जनता को अपने वोट से करना चाहिए। वहीं उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर
गंभीर सवाल उठाए।

SIR को लेकर चुनाव आयोग के अंदर भी उठे सवाल

SIR को लेकर विवाद तब और बढ़ गया जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया
कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों
और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने,
Form-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे।

क्या था विवाद?

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को लेकर कहा कि वे उनकी जानकारी या सहमति के
बिना लिए गए। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि SIR से जुड़े फैसले
मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे।

करोड़ों मतदाता नाम हटने का मुद्दा

SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से हटाए जाने को लेकर भी राजनीतिक
बहस तेज हुई है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में
ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं।

विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण तय प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला

SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के लिए सहमत हुआ है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग के कुछ फैसले सामूहिक निर्णय प्रक्रिया
के अनुरूप नहीं लिए गए।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आरोप और कानूनी दावे अभी न्यायिक जांच के विषय हैं। इसलिए इन्हें
अंतिम रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर क्यों उठ रहा सवाल?

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर भी विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। मौजूदा व्यवस्था
2023 के कानून के तहत चलती है। इस व्यवस्था में चयन समिति में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और लोकसभा
में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।

विपक्ष की मांग है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाना चाहिए।
विपक्ष का तर्क है कि इससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर लोगों का भरोसा मजबूत हो सकता है।

विवाद का असली मुद्दा क्या है?

पूरे विवाद के केंद्र में दो बड़े सवाल हैं—पहला, मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है,
और दूसरा, चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान में निर्णय किस तरह लिए जा रहे हैं।

SIR को लेकर राजनीतिक दलों के अलग-अलग दावे हैं, जबकि चुनाव आयोग और सरकार ने विपक्ष के कई आरोपों को
खारिज किया है। ऐसे में आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई
इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. SIR क्या है?

SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण) मतदाता सूची की समीक्षा और अपडेट करने की प्रक्रिया है।
इसका उद्देश्य मतदाता सूची को संशोधित करना और पात्र मतदाताओं की जानकारी को अपडेट करना है।

2. SIR को लेकर विवाद क्यों हो रहा है?

SIR को लेकर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं।
वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।

3. ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की क्या मांग है?

विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, ये राजनीतिक दलों के आरोप और मांगें हैं, जिन्हें अंतिम तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

4. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने क्या मांग की?

मुंबई में हुए संयुक्त प्रदर्शन के दौरान उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और
महाराष्ट्र में SIR को रद्द करने की मांग की।

5. क्या चुनाव आयोग के अंदर भी SIR को लेकर मतभेद हैं?

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों और
प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने इनसे जुड़े आरोपों पर अपना पक्ष भी रखा है।

6. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कैसे होती है?

मौजूदा व्यवस्था के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति में
प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।

7. विपक्ष चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में बदलाव क्यों चाहता है?

विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को मजबूत करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में
मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाना चाहिए।

8. क्या SIR के कारण करोड़ों नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं?

SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से हटाए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
हालांकि, नाम हटाए जाने का कारण और अंतिम मतदाता सूची में स्थिति अलग-अलग राज्यों और मामलों के अनुसार अलग हो सकती है।

9. क्या SIR का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है?

हां, SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं पहुंची हैं।
इन मामलों में अदालत की सुनवाई और आगे के आदेश महत्वपूर्ण होंगे।

10. इस पूरे विवाद का मुख्य मुद्दा क्या है?

विवाद के मुख्य मुद्दों में मतदाता सूची में बदलाव की पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकार और चुनाव आयोग की
निर्णय लेने की प्रक्रिया शामिल हैं।

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