खाड़ी देशों में ही क्यों है विशाल तेल भंडार
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Why are vast oil reserves found only in Gulf countries like Saudi Arabia and Iran?
खाड़ी देशों में ही क्यों है विशाल तेल भंडार
तेल और गैस आज किसी भी शहर का मुख्य सहारा हैं । कुछ दशक पहले तक कोई शहर बिना गैस और तेल के आसानी से काम चला सकता था, लेकिन आज एक छोटा गांव भी पेट्रोल-डीजल, एलपीजी के बिना कार्य नहीं कर पाएगा। यही वजह है कि दुनिया कि नजर ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर लगी है। दुनिया का एनर्जी सप्लाइर बनने की अरब जगत (सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन) और ईरान की शुरुआत 100 साल से ज्यादा पुरानी है।
इस क्षेत्र में तेल की पहली खोज 1908 में ईरान के मस्जिद-ए-सुलेमान में हुई थी। इस पहली खोज ने पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खोज-अभियानों को बढ़ावा दिया। इसके बाद इराक और पूरे अरब जगत में तेल खोजने की होड़ शुरू हुई
किस देश में कब तेल की खोज हुई
ईरान (1908): मस्जिद-ए-सुलेमान
इराक (1927): बाबा गुरगुर (किरकुक)
बहरीन (1932): जेबेल दुखान
सऊदी अरब (1938): दम्माम
कुवैत (1938): बुरगान
कतर (1939–1940): दुखान
संयुक्त अरब अमीरात (1958): मुरबान बाब
खाड़ी देशों में ही क्यों है विशाल तेल भंडार
करोड़ों साल पहले का अरब
अरब को रेत के टीलों और सूखे का पर्याय माना जाता है लेकिन इससे बहुत पहले यह ‘समुद्री क्रैडल’ था। करीब 10 करोड़ साल पहले इस क्षेत्र का ज्यादातर हिस्सा टेथिस महासागर के गर्म उथले विस्तार के नीचे डूबा हुआ था। यह पूरा इलाका प्लवक, शैवाल और सूक्ष्म जीवों से भरा हुआ था। इन्होंने ही एक गाढ़ा जैविक मिश्रण तैयार किया, जो आज के वक्त में तेल के रूप में वैश्विक अर्थव्यवस्था की बुनियाद बना हुआ है।
करोड़ों वर्ष पहले क्षेत्र के जीव मरकर समुद्र तल में समा गए और विशाल ऑक्सीजन-रहित परतों के रूप में जमा हो गए। समय के साथ तलछट ने इस जैविक पदार्थ को पूरी तरह ढक लिया और भारी दबाव के कारण इसे कसकर दबा दिया। इसके बाद का काम तेज गर्मी ने किया। गर्मी ने इस सड़ते हुए पदार्थ को हाइड्रोकार्बन में बदला। यानी आज का रेगिस्तान कभी एक जैव-रासायनिक इंजन था, जिसे सूरज ने ईंधन में बदला।
सतह के नीचे का परफेक्ट स्टोर्म
तेल बनने के लिए सिर्फ उत्पत्ति ही नहीं बल्कि उसे सुरक्षित रहने की भी जरूरत होती है। पश्चिम एशिया को इसमें खास फायदा मिला। क्षेत्र की जमीन के नीचे की बनावट पेट्रोलियम सिस्टम की पूर्णता का बेहतरीन उदाहरण है। सबसे पहले यहां भरपूर सोर्स रॉक है, जहां हाइड्रोकार्बन बनते हैं। फिर छेदों वाली रिजर्वॉयर रॉक है, जो बलुआ या चूना पत्थर होती है और इसमें तेल जमा होता है। आखिर में कैप रॉक इस सिस्टम को सील करती है, जिससेतेल बाहर नहीं रिसता है।
जमीन के नीचे यह तिकड़ी बहुत कम देखने को मिलता है
जमीन के नीचे यह तिकड़ी बहुत कम देखने को मिलता है। पश्चिम एशिया में इनका आदर्श रूप से एक साथ मिलना एक दुर्लभ उदाहरण है। इस बनावट की वजह से हाइड्रोकार्बन ना केवल बन पाए बल्कि भारी मात्रा में जमीन के नीचे फंसे रहे। दुनिया के दूसरे हिस्सों में टेक्टोनिक हलचलों यानी भूकंप, पहाड़ों का बनना या महाद्वीपों का खिसकने ने तेल के भंडारों को बिखेर दिया। इसके उलट पश्चिम में भूवैज्ञानिक शांति रही। इससे जमीन के नीचे तेल जमा हुआ और सुरक्षित भी रहा।
इस पूरे प्रोसेस में इस क्षेत्र की भूवैज्ञानिक शांति एक ऐसा मुख्य किरदार है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है। उदाहरण के लिए पैसिफिक रिंग ऑफ फायर की अस्थिर टेक्टोनिक हलचलों के विपरीत अरेबियन प्लेट लाखों सालों से स्थिर रही है। इस स्थिरता ने यह पक्का किया कि बनकर तैयार हो रहे तेल के भंडार ना तो टूटे और ना ही खराब हुए।
शांत और स्थिर स्थितियों की वजह से तेल के कुएं छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखरने और मुश्किल से मिलने के बजाय बहुत बड़े और एक-दूसरे से जुड़े हुए बने। इसका नतीजा यह हुआ कि यहां सिर्फ तेल की बहुतायत ही नहीं मिली बल्कि यह एक ही जगह पर भी मिला है। पश्चिम एशिया में तेल का एक ही जगह पर भारी मात्रा में जमा होना उसे खास बना देता है।
कच्चा तेल का मतलब यह नहीं होता है कि यह सभी जगह एक जैसा होगा
तेल के बनने और जमा होने के बाद इसके निकालने के प्रोसेस में भी पश्चिम एशिया को दूसरे क्षेत्रों पर फायदा मिलता है। इस इलाके के भंडार अक्सर बड़े, उथले और जमीन पर मौजूद तेल क्षेत्रों में होते हैं। इससे तेल यहां पर निकालना बाकी दुनिया के मानकों के हिसाब से सस्ता है। यहां गहरे पानी वाले तेल क्षेत्रों या आर्कटिक इलाकों के मुकाबले बहुत कम खर्च आता है।
कच्चा तेल का मतलब यह नहीं होता है कि यह सभी जगह एक जैसा होगा। दुनिया के अलग हिस्सों में इसकी गुणवत्ता अलग है। इसमें भी पश्चिम एशिया को बढ़त है। पश्चिम एशिया के तेल को हल्का और मीठा ( लाइट एंड स्वीट) कहा जाता है। हल्का कच्चा तेल आसानी से बहता है। वहीं मीठे कच्चे तेल में सल्फर कम होता है, जिससे इसे रिफाइन करना सस्ता पड़ता है।
होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz)
11वीं सदी से जुड़ा है इतिहास
होर्मुज शब्द के बारे में जानना है तो इतिहास का सिरा थामे हुए 11वीं सदी में चलना होगा. क्योंकि इसका सीधा संबंध प्राचीन फारसी शब्द ‘होर्मोज’ (Hormoz) से है. इसी समुद्र तट पर 11वीं सदी से 17वीं सदी तक एक धनी-समृद्ध साम्राज्य का कंट्रोल था. यहां ‘हॉर्मुज़’ नाम का एक समृद्ध बंदरगाह शहर हुआ करता था.
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