Eastern plains पूर्वी मैदान

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Eastern plains पूर्वी मैदान –

The grounds of the Aravali Ranges northeast, east and south-east is detailed. Under its Alwar, Bharatpur, Dholpur, Sawai Madhopur and Jaipur Bhilwara district, Kota, Bundi, dungarpur, Bansbadha, Pratapgarh, Udaypur and parts of districts including tonk.

यह मैदान अरावली श्रृंखला के उत्तर-पूर्व, पूर्व और दक्षिण-पूर्व में विस्तृत है। इसके अंतगर्त अलवर, भरतपुर, धौलपुर, सवाई माधोपुर जिले और जयपुर भीलवाड़ा, कोटा, बूँदी, डूंगरपूर, बांसबाड़ा, प्रतापगढ़, उदयपूर और टौंक जिलों के कुछ भाग सम्मिलित हैं।

The whole state can be divided into the following three parts इस संपूर्ण प्रदेश को निम्नलिखित तीन भागों में बाँटा जा सकता है
(1) चम्बल बेसिन,
(2) बनास बेसिन और
(3) मध्यमाही बेसिन

(1) Chambal basin – Kota, Bundi, tonk, Dholpur, Sawai Madhopur and Dholpur districts is wide. Chambal valley topography of hills and plateaus. New Jlot deposits are found in the valley. The area floodplains, river Kangar, rugged and inter Sthlakritiya Sarita etc. is found. Chambal ravines in the basin area of 4500 square kilometers.Most important to the Rugged Brtan quotas and quotas to the upper Vindhyyn verge spread over Dholpur. These rugged, almost 400 years old. Chambal basin humid type of climate is found in the state where 60 cm 100 cm Between rainfall. Gishm is high summer temperatures that generally 30 degrees. Is higher than.While the average temperature in summer is 17 degrees cold. lives. Because of the substantial amount of rain Dukdha, mango, fig, Jamun, Acacia, Banyan Tree etc. are found here. And cultivation of the soil that is fertile. Baluka glass in the region, China clay and limestone mines, many of which are found in abundance in the development of the economy that have helped.

(1) चम्बल बेसिन – कोटा, बूँदी, टौंक, धौलपुर, सवाई माधोपुर और धौलपुर जिलों में विस्तृत है। चंबल घाटी की स्थलाकृति पहाड़ियों और पठारों से निर्मित है। संपूर्ण घाटी में नवीन जलोठ जमाव पाये जाते हैं। इस क्षेत्र में बाढ़ के मैदान, नदी कंगार, बीहड़ व अन्त: सरिता आदि स्थलाकृतियाँ पायी जाती है। चंबल बेसिन में बीहड़ों का क्षेत्र 4500 वर्ग किलोमीटर है। सर्वाधिक महत्वपूर्ण बीहड़ कोटा से बरटां तक और कोटा से धौलपुर तक ऊपरी विंध्ययन कगार में विस्तृत हैं। ये बीहड़ लगभग 400 वर्ष पुराने हैं। चंबल बेसिन प्रदेश में आद्र प्रकार की जलवायु पाई जाती है जहां 60  से.मी. से 100 से.मी. के बीच वर्षा होती है। गीष्म ॠतु में तापमान उच्च रहता है जो कि समान्यत: 30डिग्री से. से अधिक रहता है जबकि शीत ॠतु में औसत तापमान 17 डिग्री से. रहता है। वर्षा की पर्याप्त मात्रा के कारण धौकड़ा, आम, गूलर, जामून, बबूल, बरगद आदि वृक्ष यहां पर पाए जाते हैं। मिट्टी उपजाऊ कि की एंव कृषि के योग्य है। इस प्रदेश में काँच बालूका, चीनी मृत्तिका तथा चूने के पत्थर की अनेक खानें बहुतायत से मिलती हैं जो कि यहां की अर्थव्यवस्था के विकास में सहायक सिद्ध हुई हैं।

(2) Banas Basin – Banas and its tributaries (Khari, Sodra, Busi and Murl) fed by the ground in the south and north of Mewar Malpura Karoli ground is called ground. It extends to the eastern parts of Udaipur, Chittorgarh western, Bhilwara, tonk, Jaipur, Sawai Madhopur and Alwar southern parts of western reaches. The average height of the field is between 280 meters to 500 meters. The ground has to build layouts CopiyThe thin layers of clay and shale, whose evolution is due to the erosion of the cliffs of granite and Nice. The amount of rainfall 60 cm 9 0 cm In the middle of fertile Mittiya AND irrigation facilities but important agricultural region of Rajasthan is due. Gishm temperature in summer is generally 36 degrees. More than 16 degrees in summer and winter. lives.Malpura-Kiroli Ground – Kishan Garh and in most parts of Malpura over layers of alluvial deposition thickness of the part is the height of 280-400 meters. It is dominated by elegant and Nice.
(2) बनास बेसिन – बनास तथा उसकी सहायक नदियों (खारी, सोड़रा, भौसी और मौरल) द्वारा सिंचित यह मैदान दक्षिण में मेवाड़ का मैदान तथा उत्तर में मालपुरा करोली का मैदान कहलाता है। इसका विस्तार उदयपुर के पूर्वी भागों, पश्चिमी चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, टौंक, जयपुर, पश्चिमी सवाई माधोपुर और अलवर के दक्षिणी भागों तक है। इस मैदान की औसत ऊँचाई 280 मीटर से 500 मीटर के मध्य है। इस मैदान का निर्माण कॉपीय जमावों से हुआ है। मिट्टी की पर्ते पतली व पथरीली है जिनका प्रादुर्भाव यहां ग्रेनाइट और नीस की चट्टानों के अपरदन के कारण हुआ है। वर्षा की मात्रा 60 से.मी. से 90 से.मी. के मध्य होती है लेकिन उपजाऊ मिट्टियाँ एंव सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के कारण राजस्थान का महत्वपूर्ण कृषि प्रदेश है। तापमान गीष्म ॠतु में समान्यत: 36 डिग्री से. से अधिक और शीत ॠतु में 16 डिग्री से. रहता है। मालपुरा-कीरोली का मैदान – किशन गढ़ और मालपुरा के अधिकांश भागों में जलोढ़ जमाव की परतों से अधिक मोटाई का यह भाग 280-400 मीटर की ऊँचाई का है। इसमें शिष्ट और नीस की प्रधानता है।

(3) Mdyamahi basin – south-east of Udaipur, Chittorgarh districts Basbadha and is detailed in the southern parts. The region’s main river yearly. Average height is 200 to 400 meters of the ground. Pratapgarh and fifty-six grams Basbadha Located in the middle of the field is also known as the field of fifty-six. The rainfall averages 100 cm is. Consequently teak and bamboo trees are found in abundance. Mdyamahi nearly 40 percent of the basin is agriculture. Due to the mountainous western part is not accessible.
(3) मध्यमाही बेसिन – उदयपुर के दक्षिण-पूर्व, बाँसबाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिलों के दक्षिणी भागों में विस्तृत है। इस क्षेत्र की मुख्य नदी माही है। इस मैदान की औसत ऊँचाई 200 से 400 मीटर है। प्रतापगढ़ और बाँसबाड़ा के मध्य में छप्पन ग्राम स्थित होने के कारण इस मैदान को छप्पन का मैदान भी कहते है। यहां वर्षा का औसत 100 से.मी. है। इसके फलस्वरुप सागवान और बाँस के वृक्ष बहुतायत से मिलते हैं। मध्यमाही बेसिन के लगभग 40 प्रतिशत भाग पर कृषि की जाती है। पश्चिमी भाग पहाड़ी होने के कारण सुगम्य नही है।
(4) South Eastern Plateau दक्षिणी पूर्वी पठार –

t is located in the southeastern part of the state, 380 meters high above sea level. The Kota, Bundi, Jhalawar, Rajasthan, Chittorgarh etc. districts and is detailed in section 9 .6 percent. The state of the ground is soft and rocky ground below. It also called plateau of Hadoti. It is the appropriate amount. Therefore, the shady trees, ponds, rivers, agricultural fields, etc. are found. Banas, Banganga, Kali Sindh and mountainous rivers flowing in this section. There is sporadic farming plains.

यह राज्य के दक्षिण-पूर्व भाग में स्थित है जो समुद्र तल से 380 मीटर ऊँचा है। इसमें कोटा, बूँदी, झालावाड़, चित्तौड़गढ़ आदि जिले शामिल हैं और राजस्थान के 9.6 प्रतिशत भाग में विस्तृत है। इस प्रदेश में ऊपर की भूमि नर्म और नीचे की भूमि चट्टानी है। इसे हड़ौती का पठार भी कहते हैं। इसमें वर्षा उचित मात्रा में होती है। अत: यहां छायादार वृक्ष, तालाब, नदियाँ, खेती योग्य मैदान आदि पाए जाते हैं। बनास, बाणगंगा, काली सिंध और पर्वती नदियां इसी भाग में बहती हैं। कहीं-कहीं मैदानी भाग में खेती भी होती है।
The plateau can be divided into two parts  इस पठार को दो भागों में बाँटा जा सकता है

(1) Vindyan brink ground – it is mostly built with large sandstone rock is gray in between. Its height is 350 meters and 550 meters. The terrain ledge parallel Vindyan probably due to solid Aravali is folded and faulted. Banas and Chambal these edges extending between the south and the east and to the east of Bundelkhandh. Mainly in the Dholpur and Karauli.

(1) विंध्यन कगार भूमि – इसका अधिकांश क्षेत्र बड़े-बड़े बलुआ पत्थरों से निर्मित है जिनके बीच-बीच में स्लेटी पत्थर भी है। इसकी ऊँचाई 350 मीटर से 550 मीटर है। इस भू-भाग में समानान्तर विंध्यन कगार संभवत: ठोस अरावली के कारण वलित और भ्रंशित है। इन कगारों का विस्तार बनास और चंबल के मध्य दक्षिण व पूर्व की ओर और बुन्देलखंड़ के पूर्व तक है। मुख्यत: यह धौलपुर और करौली में हैं।

(2) The Deccan lava plateau – Bluka area largely made of stones and stone gray in between. It is a wide and rocky high state. Somewhere in the land of black soil area of river valleys meet. Deccan Treplawa congestion at the base of the edges Vindyan areas are visible. It includes Kota-Bundi plateau. Bundi Satpur near its highest peak is 545 meters. Crop part plateau dissected by rivers has been.Gishm summer temperatures in the state in south-eastern plateau of 32 degrees from 38 degrees. And cold winters of 14 degrees, low of lives. Shit by cyclones in summer rainfall is slight.
(2) दक्कन लावा पठार – इसका अधिकांश क्षेत्र बलुका पत्थरों और बीच-बीच में स्लेटी पत्थरों का बना है। यह एक विस्तृत और पथरीला उच्च प्रदेश है। इस भू-भाग में नदी घाटियों में कहीं-कहीं काली मिट्टी के क्षेत्र मिलते हैं। विंध्यन कगारों के आधार तल क्षेत्रों पर दक्कन ट्रेपलावा के जमाव दृष्टिगोचर होते हैं। इसमें कोटा-बूंदी पठार भी सम्मिलित हैं। बूंदी में इसकी सबसे ऊँची चोटी सतपुर के निकट 545मीटर है। नदियों द्वारा पठारी भाग को काँट-छाँट कर विच्छेदित कर लिया गया है। दक्षिण-पूर्वी पठार के प्रदेश में तापक्रम गीष्म ॠतु में 32 डिग्री से 38 डिग्री से. तथा शीत ॠतु में 14 डिग्री से, से नीचा रहता है। शीत् ॠतु में चक्रवातों के द्वारा थोड़ी सी वर्षा हो जाती है।

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