Rajasthan chief fortification राजस्थान के प्रमुख दुर्ग part 2

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Rajasthan chief fortification राजस्थान के प्रमुख दुर्ग part 2

(6)सोनारगढ़ दुर्ग(जैसलमेर) (Sonargdh fort (Jaisalmer)

सोनारगढ़ दुर्ग को उत्तर भड़ किवाड़ कहते है। 

सोनारगढ़ दुर्ग  दुर्ग धान्व व गिरी श्रेणी का दुर्ग है।

सोनारगढ़ दुर्ग  दुर्ग त्रिकुट पहाड़ी/ गोहरान पहाड़ी पर बनी है।

सोनारगढ़ दुर्ग  के अन्य नाम – गोहरानगढ़ , जैसाणागढ़

Sonargdh fort founded in 1155 AD by the Bhati -rav Jaisal. Happened. Lime has been used in the construction of the fort. Due to this, the use of the yellow stone fortress Sonargdh called it Swarngiri 99 turret. Sonargdh fort in Rajasthan after Chittorgarh Fort is the largest living.

सोनारगढ़ दुर्ग की स्थापना -राव जैसल भाटी के द्वारा 1155 ई. में हुआ। ओर दुर्ग के निर्माण में चूने का प्रयोग नहीं हुआ है। इसमे पीले पत्थरों का प्रयोग होने के कारण से इसको  स्वर्णगिरि कहलाता है सोनारगढ़ दुर्ग  में 99 बुर्ज है।  सोनारगढ़ दुर्ग राजस्थान में चित्तौड़गढ के पश्चात् सबसे बडा लिविंग फोर्ट है।

Sonargdh fort (Jaisalmer Fort), the most prominent feature of these books is a rare treasure, which is called Jinbdra. In 2005, the World Heritage List has been included in the fortification. Oscar-winning “filmmaker Satyjitre” movie was filmed at the fort. 

सोनारगढ़ दुर्ग(जैसलमेर दुर्ग )की सबसे प्रमुख विशेषता इसमें ग्रन्थों का एक दुर्लभ भण्डार है जो जिनभद्र कहलाता है। सन् 2005 में इस दुर्ग को वल्र्ड हैरिटेज सूची में शामिल किया गया। आॅस्कर विजेता “फिल्म निर्माता  सत्यजीतरे” ने  इस दुर्ग पर फिल्म फिल्माई गई।

सोनारगढ़ दुर्ग  में ढाई साके हुए है। (The citadel has two Sonargdh sake.)

(a).पहला साका – दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलज्जी व भाटी शासक मूलराज के मध्य युद्ध हुआ।

(b).दूसरा साका – फिरोज शाह तुगलक के आक्रमण रावल दूदा व त्रिलोक सिंह के नेतृत्व मे वीरगति प्राप्त की।

(c).तीसरा साका – जैसलमेर का तीसरा साका जैसलमेर का अर्द्ध साका राव लूणसर में 1550 ई. में हुआ।

 

(7)मैग्जीन दुर्ग(अजमेर) (Magazine fortress (Ajmer)

Magazine fortress site falls in the category building was built by the Mughal emperor Akbar built the fort “Dultkhana Akbar” is known as the citadel of Muslim architecture is based on completely.

मैग्जीन दुर्ग  स्थल श्रेणी मे आता है इसका निर्माण मुगल सम्राट अकबर ने निर्माण ने करवाया था ओर इस दुर्ग को ” अकबर का दौलतखाना” के रूप में जाना जाता है।यह दुर्ग पूर्णतः मुस्लिम स्थापत्य कला पर आधारित है।

Note :सर टाॅमस ने सन् 1616 ई. में जहांगीर को अपना परिचय पत्र इसी दुर्ग में प्रस्तुत किया।

(8)आमेर दुर्ग-आमेर (जयपुर) (Amer fort-Amer (Jaipur)

(Amer Amer fort-kernel comes in range.) आमेर दुर्ग-आमेर गिरी श्रेणी मे आता है।

(The fort built in 1150 AD. Kchcwah built by Dulhray.) इस दुर्ग का निर्माण 1150 ई. में दुल्हराय कच्छवाह ने करवाया।

(This fort is famous primarily for temples.)यह दुर्ग मंदिरों के लिए प्रमुख रूप से  प्रसिद्ध है।

It (1) Kseela Mother’s Temple (2) Temple Suhag (3) World Siromani Temple इसमे (1).शीला माता का मंदिर (2) सुहाग मंदिर (3 )जगत सिरोमणि मंदिर

 

Note: Habr about the beauty of the palaces of Amber writes that “I saw in the Kremlin and Albrhraa hear about what is more important, the Palace.”

हैबर आमेर के महलों की सुंदरता के बारे में लिखता है कि ” मैने क्रेमलिन में जो कुछ देखा है और अलब्रह्राा के बारे में जो कुछ सुना है उससे भी बढ़कर ये महल है।”

(9)जयगढ दुर्ग(जयपुर) (Jaygd fort (Jaipur)

Jaygd Cilh fortification remains on the hill called Tila. Construction of the fort built by Mirza Raja Jaygd Jayysinh. But the construction of palaces built by Sawai Jai Singh. It is located in the cannon flexible factory. The citadel built by Sawai Jai Singh Jaygd Jayban cannon standing on the hills is considered the biggest cannon.

जयगढ दुर्ग  चिल्ह का टिला नामक पहाड़ी पर बना हुआ है। जयगढ दुर्ग  का निर्माण मिर्जा राजा जययसिंह ने करवाया। लेकिन महलों का निर्माण सवाई जयसिंह ने करवाया। इसमे   में तोप ढ़ालने का कारखाना स्थित है। जयगढ दुर्ग में सवाई जयसिंह निर्मित जयबाण तोप पहाडि़यों पर खडी सबसे बड़ी तोप मानी जाती है।

Note: पूर्व प्रधानमंत्री श्री मति इन्द्रागांधी ने आपातकाल के  समय   खजाने की प्राप्ति के लिए इस दुर्ग  की खुदाई करवाई गई।

 

(10)नहारगढ दुर्ग(जयपुर) (Nhargd fort (Jaipur)

The fortification was built in 1734 by Sawai Jai Singh Nhargd released. Sudarshan Krishna temple within its existing fortification is Sudrshngdh former name.

नहारगढ दुर्ग  का निर्माण 1734 में सवाई जयसिंह नें किया। इसके भीतर विद्यमान सुदर्शन कृष्ण मंदिर दुर्ग का पूर्व नाम सूदर्शनगढ़ है।

The fort was named after Bhomia Nahrsinh Nhargdh. नाहरसिंह भोमिया के नाम पर इस दुर्ग का नहारगढ़ रखा गया।

Rao Madho Singh II – the castle built for his beloved nine orchestrated Nahargarh Fort. The fort is located near the botanical garden.

राव माधों सिंह – द्वितीय ने अपनी नौ प्रेयसियों के लिए इस दुर्ग  का निर्माण नाहरगढ़ दुर्ग में करवाया। इस दुर्ग के पास जैविक उद्यान स्थित है।

(11)गागरोण दुर्ग(झालावाड़) (Gagron fortification (Jhalawar))

Fortress Construction Gagron Bijldev Parmar dynasty built by the rulers of the Dodd branch. The fortification of the right side of the Rajputs Doda Dodgd / Dhulrgdh also known by the names. “Chauhan total Kalpdraum” drawn by the founder of the dynasty, not his brother Devan Singh alias Daru Bijldev Dodd killing Gagron Dhulrgdh took over and kept his name. And this without any foundation Mukndera hill fort stands on the rocks directly is unique fort गागरोण दुर्ग  का निर्माण परमार वंश की डोड शाखा के शासक बीजलदेव ने करवाया। ओर  डोडा राजपूतों के अधिकार के कारण यह दुर्ग डोडगढ/ धूलरगढ़ नामों से भी जाना गया। “चैहान कुल कल्पद्रुम” के अनुसार खींची राजवंश का संस्थापक देवन सिंह उर्फ धारू न अपने बहनोई बीजलदेव डोड को मारकर धूलरगढ़ पर अधिकार कर लिया तथा उसका नाम गागरोण रखा। तथा यह दुर्ग बिना किसी नीव के मुकंदरा पहाड़ी की सीधी चट्टानों पर खड़ा अनूठा किला है।

Note:गागरोण दुर्ग कालीसिंध व आहु नदियों के संगम पर बना जल श्रेणी का दुर्ग है।

साके (Sake)

(1).The first Saka – year 1423 AD. Acldas drawn (son of communion) and the Sultan of Mandu Alpankha Gauri (Honshgshah) between Bishn War. After the victory of the load Shazate Jagni Khan were handed fortification.

पहला साका – सन् 1423 ई. में अचलदास खींची (भोज का पुत्र) तथा मांडू के सुलतान अलपंखा गौरी (होंशगशाह) के मध्य भीष्ण युद्ध हुआ। जीत के बाद दुर्ग का भार शहजाते जगनी खां को सौपा गया।

गागरोज के प्रथम साके का विवरण शिवदास गाढण द्वारा लिखित पुस्तक ‘ अचलदास खींची री वचनिका’ में मिलता है।

(2)Second Saka – year 1444 AD. Walhnsi drawn between war and Mahmud Khilji. Palhnsi drew killed by the Bilo (when he was able to flee to Dug) sent by Kumbha unhurried (Girjdev) led by saffron and Llnaon Jauhar.

.दूसरा साका – सन् 1444 ई. में वाल्हणसी खीची व महमूद खिलजी के मध्य युद्ध हुआ। पाल्हणसी खींची को भीलो ने मार दिया (जब वह दुग् में पलायन कर रहा था) कुम्भा द्वारा भेजे गए धीरा (घीरजदेव) ने नेतृत्व में केसरिया हुआ और ललनाओं ने जौहर किया।

Note:महमूद खिलजी ने विजय के उपरांत दुर्ग का नाम बदल कर मुस्तफाबाद रखा।

अकबर ने गागरोण दुर्ग बीकानेर के राजा कल्याणमल पुत्र पृथ्वीराज को जागीर में दे दिया जो एक भक्त कवि और वीर योद्धा था।

Note:विद्वानों के अनुसार इस पृथ्वीराज ने अपना प्रसिद्व ग्रन्थ “वेलिक्रिसन रूकमणीरी” गागरोण में रहकर लिखा।

(12)    कुम्भलगढ़ दुर्ग(राजसमंद)(Kumbhalgarh Fort (Rajsamand)

Kumbhalgarh fort surrounded by the Aravali thirteen peaks, Jrga hill (1148 m.), Built at the height of the tower is down range. Kumbhalgarh fortification built by Maharana Kumbha v. Samvat 1505 AD., Erected in memory of his wife Kumbldevi. The citadel is called the eye of Mewar.

कुम्भलगढ़ दुर्ग अरावली की तेरह चोटियों से घिरा, जरगा पहाडी पर (1148 मी.) ऊंचाई पर निर्मित गिरी श्रेणी का दुर्ग है। कुम्भलगढ़ दुर्ग  का निर्माण महाराणा कुम्भा ने वि. संवत् 1505 ई. में अपनी पत्नी कुम्भलदेवी की स्मृति में बनवाया। ओर  इस दुर्ग को मेवाड़ की आंख कहते है। 

Note : कुम्भलगढ़ दुर्ग का निर्माण कुम्भा के प्रमुख शिल्पी मण्डन की व देखरेख में हुआ।

Kumbhalgarh fortification height of about Fazal Atril that “it remains so Bulndi turban head to view the falls from below.” Compared to the Colonel Taॅd the fort “Stukn” is from.

कुम्भलगढ़ दुर्ग की ऊंचाई के बारे में अतृल फजल ने लिखा है कि ” यह इतनी बुलन्दी पर बना हुआ है कि नीचे से देखने पर सिर से पगड़ी गिर जाती है।” ओर  कर्नल टाॅड ने इस दुर्ग की तुलना “एस्टुकन”से की है।

Kumbhalgarh fortification around 36 kms Wall remains. Four breadth of the wall so that the rider can go in together. It the ‘Great Wall of India’ is called.

कुम्भलगढ़ दुर्ग  के चारों और 36 कि.मी. लम्बी दीवार बनी हुई है। दीवार की चैड़ाई इतनी है कि चार घुडसवार एक साथ अन्दर जा सकते है। इस लिए इसे ‘भारत की महान दीवार’ भी कहा जाता है।

Kumbhalgarh fortification Alias – Kumblmer Kumblmeru, and Mahor Kunbpur Mchced.

कुम्भलगढ़ दुर्ग  के अन्य नाम – कुम्भलमेर कुम्भलमेरू, कुंभपुर मच्छेद और माहोर।

Kumblgd fortress is also located within a small castle, which is called Ktargdh, which is the residence of Maharana Kumbha.

कुम्भलगढ दुर्ग के भीतर एक लघु दुर्ग भी स्थित है, जिसे कटारगढ़ कहते है, जो महाराणा कुम्भा का निवास स्थान रहा है।

Maharana Kumbha killing his eldest prince Uda (Udaykrn) not in the fort.

महाराणा कुम्भा की हत्या उनके ज्येष्ठ राजकुमार ऊदा (उदयकरण) न इसी दुर्ग में की।

The Castle ‘occurred Queen Malika’ is located. इस दुर्ग में ‘झाली रानी का मालिका’ स्थित है।

SAD Uday Singh and Veer Pratap’s coronation is Huaa born in Kumbhalgarh fort.

उदयसिंह का राज्यभिषेक तथा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का जन्म कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुआा है।

(13)   बयाना दुर्ग (भरतपुर) (Earnest fortification (Bharatpur))

Palladium fell range comes in earnest. Fortress Construction Vijaypal Singh Yadav had not earnest.

बयाना दुर्ग  गिरी श्रेणी मे आता है।  बयाना दुर्ग का निर्माण विजयपाल सिंह यादव न करवाया।

Other names Sonitpur earnest fortification, Banpur, Sripur and is Sripth.

बयाना दुर्ग के अन्य नाम- शोणितपुर, बाणपुर, श्रीपुर एवं श्रीपथ है।

Note: Due to its Durbedyta emperor fortress and citadel also known as Victory Temple.

अपनी दुर्भेद्यता के कारण बादशाह दुर्ग व विजय मंदिर गढ भी कहलाता है।

(14)   सिवाणा दुर्ग(बाड़मेर) (Siwana fortification (Barmer)

Siwana fortification both kernel and forest fortification category. Due to the overabundance of Kumt Kumt fort is also known as bush. Mr. Virnarayn Pwanr Siwana fortification built in the hills made fifty six.

सिवाणा दुर्ग  गिरी तथा वन दोनों श्रेणी का दुर्ग है। ओर कुमट झाड़ी की अधिकता के कारण इसे कुमट दुर्ग भी कहते है। सिवाणा दुर्ग  का निर्माण श्री वीरनारायण पवांर ने छप्पन की पहाडि़यों में करवाया।

इस दुर्ग में दो साके हुए है। (The fort has two sake.)

(1).The first Saka – year 1308 AD. Shitldev Chauhan while Alauddin Khilji invaders invasion occurred because of Sanka.

पहला साका – सन् 1308 ई. में शीतलदेव चैहान के समय आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के कारण सांका हुआ।

(2).Second Saka – aided by stout heroic king Akbar Kalla Uday Singh Rathore due to invasion of the Saka. The Saka year 1565. Happened.

दूसरा साका – वीर कल्ला राठौड़ के समय अकबर से सहायता प्राप्त मोटा राजा उदयसिंह के आक्रमण के कारण साका हुआ। यह साका सन 1565 ई. में हुआ।

(15)  जालौर दुर्ग(जालौर) (Jalore Fort (Jalore)

Jalore Fort kernel comes in range. The fort is situated on the hill fortification Sone. Jalore Fort, the ancient name – and Knkacl Jabalipur fortification.

 जालौर दुर्ग  गिरी श्रेणी मे आता है। यह दुर्ग सोन पहाडी पर स्थित दुर्ग है।  जालौर दुर्ग का प्राचीन नाम – जाबालीपुर दुर्ग तथा कनकाचल।

Other names Suvarngiri Jalore Fort, Songadh.

जालौर दुर्ग के अन्य नाम- सुवर्णगिरी, सोनगढ़।

 

 

More click Here:Rajasthan Chief Fortification राजस्थान के प्रमुख दुर्ग Part 1

 


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