Sisodia dynasty History सिसोदिया राजवंश का इतिहास part 1

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Sisodia dynasty History सिसोदिया राजवंश का इतिहास part 1

1316 AD. After the death of Alauddin Khilji in the next ten years then Sisoda village Hmmir normally in possession of the Mewar dynasty new Sisodia dynasty established.

1316 ई. में अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के बाद तब सिसोदा गांव के सामान्त हम्मीर ने अगले दस वर्षो में पूरे मेवाड़ पर अधिकार कर नये वंश सिसोदिया वंश की स्थापना की।

Her “Vismgati panchanan” savior of Mewar, “and in the book beloved jolly” Virraja “was coined. In his time as” The Cbutra Ntni is built on the shores of Lake Pichhala.

उसे ” विषमघाटी पंचानन” मेवाड़ का उद्धारक” और रसिक प्रिया ग्रन्थ में “वीरराजा” की संज्ञा दी गयी थी । उसके समय मे ही ” नटणी का चबुतरा बनवाया जो पिछाला झील के तट पर है।

Kheta and Rana Rana Lakha Lakha after Hmmir happened during the reign of the ruler of Udaipur or silver in Zawar Khan said. At the same time, the 14th century name Pichcu Bnjare (Cidimar) built the Udaipur Lake Pichhola.

हम्मीर के बाद खेता और राणा लाखा शासक हुआ राणा लाखा के शासन काल में उदयपुर न के जावर मे चांदी की ख़ान मिली । इसी के समय 14 वीं सदी पिच्छू नाम बनजारे (चिडिमार) ने उदयपुर में पिछौला झील का निर्माण करवाया।

Rana Lakha Rathod Ranmal married the sister of his son Cuda Kuvanr Hansa Hansa Bai Bai fixed but he himself married Rana Lakha. Hansa Bai imposed a condition that his son ruler of Mewar, which stipulates forming Kuvanr Cuda conceded. Kuvanr lifelong singleness of the same promise because of Bhishma Bhishma Pitamah of Rajasthan, called Cuda. After Lakha Rana of Mewar ruler Mokl Hnsabai son. 1433 E. Mokl killing. Mokl his uncle and the son of Kumbha today also want to kill the But of Marwar and Mewar Radhav Ranmal Rathore Dev Sisodia to Kumbha of Mewar ruler.

राणा लाखा ने अपने पुत्र कुवंर चूडा का विवाह रणमल राठौड़ की बहन हंसा बाई से तय किया किन्तु स्वयं राणा लाखा  ने हंसा बाई से विवाह किया । हंसा बाई ने शर्त रखी कि अपने पुत्र को मेवाड का शासक, बनाने की शर्त रखी जो कुवंर चूडा ने मान लिया। कुवंर ने आजीवन अविवाहित रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की इसी के कारण चूडा को राजस्थान का भीष्म पितामाह कहा जाता है। राणा लाखा के बाद हंसाबाई  का पुत्र मोकल मेवाड़ का शासक बना। मोकल की हत्या 1433 ई. में उसके चाचा ने की तथा मोकल के पुत्र कुम्भा को भी मारना चाहते थें परन्तु मारवाड़ के रणमल राठौड व मेवाड़ के राधव देव सिसोदिया ने कुम्भा को मेवाड़ का शासक बनाया।

 

राणा कुम्भा (कुंभकरण) Rana Kumbha (Kunbkrn)

Rana Kumbha (1433-1468 AD). Father of Rajasthan architecture fortification Rana Kumbha of Mewar 32 of 84 Durgo in 1433 by Rana Kumbha Develop Sarangpur Mahmud Khilji first defeated in the battle of the ruler of Malwa. In 1444, commemorating the conquest of Rana Kumbha the Chittor Fort, built in the Victory Column Victory Column current response is a sign of the Rajasthan police. Victory Column architect Rao was Jata Victory Column, Kirti column, Kumbha Shyam Temple (Mira Temple), Kunblgd fortification (Rajasnmd), make a fort (Sirohi) Basanti fortification (Sirohi), Aclgdhdurg (Abu Maut) and maintain

राणा कुम्भा  (1433-1468 ई). राजस्थान की स्थापत्य कला का जनक मेवाड़ के 84 दुर्गो में से 32 दुर्ग राणा कुम्भा ने बनवाएं राणा कुम्भा  1433 में सारंगपुर के युद्ध में मालवा के शासक महमुद खिलजी प्रथम को हराया । राणा कुम्भा ने  इसी विजय के उपलक्ष में 1444 में चित्तौड़ किले में विजय स्तम्भ का निर्माण करवाया वर्तमान में विजय स्तम्भ राजस्थान पुलिस का प्रतिक चिन्ह है। विजय स्तम्भ वास्तुकार राव जैता था विजय स्तम्भ,कीर्ति स्तम्भ,कुम्भ श्याम मंदिर (मीरा मंदिर),कुंभलगढ दुर्ग (राजसंमद),मचाना दुर्ग (सिरोही)बसंती दुर्ग (सिरोही),अचलगढ़दुर्ग (माऊट आबू) आदि बनाए

Rana Kumbha was a scholar of music. Rana Kumbha the “Abhinw Btrtachary” by Rana Kumbha, also called “Sngeetraj” “Rsikpriy” “Dance” “Ratan Fund” and “Sud” Managing the creation of texts and commentary on Rasika Priya Gita Govinda. Mndn renowned architect was at the court of Rana Kumbha. The “Mndn as” “Offering Mndn” “Washumndn” “Rupawatar Mndn” composed texts. Rupawatar Mndn (sculpture episode) It gives information on sculpture.Natha’s brother Mndn the “Vshumnjri” son of Govind Mndn book composed of “Emancipation Gurini” “Deepik door” and the court poet Kumbha Kanh Vyas Ji “wrote treatises in ekalinga. 1468 e. Kumbhalgarh Castle, son of Rana Kumbha Uda (Udaykrn) murdered his father. Udaykrn called the patricide.

राणा कुंभा संगीत के विद्वान था । राणा कुंभा को ” अभिन्व भत्र्ताचार्य भी कहा जाता हैं राणा कुंभा ने “संगीतराज “रसिकप्रिय” “नृत्य” “रतन कोष” व “सूढ प्रबंध” आदि ग्रन्थों की रचना की रसिका प्रिया गीत गोविन्द पर टीका है। राणा कुंभा के दरबार में प्रसिद्ध शिल्पकार मण्डन था। जिसने “रूप मण्डन” “प्रसाद मण्डन” “वास्तुमण्डन” “रूपावतार मण्डन” ग्रन्थों की रचना की। रूपावतार मण्डन (मूर्ति निर्माण प्रकरण) इसमें मूर्ति निर्माण की जानकारी मिलती है। मण्डन के भाई नाथा ने “वस्तुमंजरी” पुस्तक की रचना की मण्डन के पुत्र गोविन्द ने “उद्धार घौरिणी” “द्वार दीपिक” व कुंभा के दरबारी कवि कान्ह जी व्यास ने “एकलिंग में ग्रंथ लिखा। 1468 ई. कुंभलगढ़ दुर्ग में राणा कुंभा के पुत्र ऊदा (उदयकरण) ने अपने पिता की हत्या कर दी। उदयकरण को पितृहंता कहा जाता है।

ऊदा (उदयकरण) → रायमल (1509 में देहांत) Uda (Udaykrn) → Rayml (died in 1509)

Prithvi Raj Sisodia (flying prince) Ranasngram Singh (1509-1528) (Hindupat) (May 5th coronation in 1509, died January 30, 1528)  पृथ्वी राज सिसोदिया (उडना राजकुमार)      राणासंग्राम सिंह(1509-1528) (हिन्दुपात)(5 मई 1509 में राज्यभिषेक 30 जनवरी 1528 में मृत्यु)

Kumbha of Mewar son Rayml banished from the Uda and the ruler himself. Sisodia was the fastest runner of the greatest sons Prithviraj Rayml. He was flying Prince was called. 1509 E Rayml Sangram Singh’s son became the ruler of Mewar.

कुंभा के पुत्र रायमल ने ऊदा को मेवाड़ से भगा दिया एवं स्वयं शासक बना। रायमल का बडा पुत्र पृथ्वीराज सिसोदिया तेज धावक था। अतः उसे उडना राजकुमार कहा जाता था। 1509 ई में रायमल का पुत्र संग्राम सिंह मेवाड का शासक बना।

Next part uploading soon  


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